
*इससे और अच्छे दिन क्या होंगे क्षेत्र की जनता के लिए,,*
*सरदारपुर प्रस्तुति डिलीवरी वार्ड पुरानी हादसे का इंतजार करती प्रशासन कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा*
*सरकारी अस्पताल की छत से टपकता पानी, मरीज फिर भी इलाज कराने को मजबूर –*
*डिलीवरी वार्ड जर्जर अवस्था में पलंग की कमी के कारण जमीन पर लेटना पड़ रहा गर्भवती महिला को*
*कम से कम 20 बेड का हॉस्पिटल तो होना चाहिए इसमें एक्सीडेंट की ड्रेसिंग से लगाकर डिलीवरी तक यहीं पर हो जाए*

सरदारपुर अस्पताल कि जिम्मेदारी तो डॉक्टर जोशी, व शीला मुजाल्दा के साथ ने संभाल ली मगर व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे कोई भी जिम्मेदार अधिकारी
नेता सरकार भले ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा करती हो लेकिन जमीनी हकीकत सरकार व क्षेत्रीय अधिकारी के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है.।
सरकारी अस्पताल की छत से टपकता पानी व बिना पलंग वह बिना बिस्तर के गर्भवती महिला जमीन पर सोने पर मजबूर
धार। सरदारपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों के लिए जरूरी संसाधनों की कमी के चलते करीब 50 से भी अधिक गांवों से आने वाले मरीजों को काफी परेशान होना पड़ता है. यहां पर बारिश की वजह से अस्पताल का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं है
जिसकी छत से पानी नहीं टपकता हो. मजबूरन मरीजों को टपकती छत के नीचे उपचार करना पड़ रहा है.
साथ ही गर्भवती महिला प्रस्तुति केंद्र पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया जिसमें कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है
साथ ही गर्भवती महिलाओं को व्यवस्था के कारण पलंग भी नहीं मिल पा रहे साथ ही बिना गद्दे के ही जमीन पर सोने को मजबूर यह स्थिति देखकर सरदारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर भी बेहद परेशान है एक तरफ सरकार ने करोड़ों रुपए की लागत से नए अस्पताल का निर्माण तो करवा दिया गया
मगर राजनीति के चलते लोकार्पण के कारण उसे अभी तक चालू नहीं किया गया प्रस्तुति कक्ष जर्जर अवस्था में कभी भी हो सकता कोई बड़ा हादसा कल भी प्रस्तुति कक्षा डिलीवरी वार्ड के पीछे का कुछ हिस्सा पानी की वजह से गिरा जिस किसी को जान नानी नहीं हुई मगर जिमेदार कर रहे बडे हादसे का इंतजार
सरदारपुर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक्स-रे मशीन भी कई दिनों से बंद सहित सोनोग्राफी की सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है. जिसके चलते यहां पर दुर्घटना के दौरान गम्भीर रूप से घायल मरीजों को रेफर कर दिया जाता है.
यहां पर मशीनों की व्यवस्था के कारण विशेषज्ञ डॉक्टर से उपचार कराने मरीजों को जिला अस्पताल जाना पड़ता है. सरदारपुर विकासखंड से सैकड़ों आदिवासी ग्राम जुड़े हुए है. लेकिन स्थानीय विधायक प्रताप ग्रेवाल व भाजपा के पूर्व विधायक वेलसिंग जी भूरिया व पूर्व कैबिनेट मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव व धार लोकप्रिय सांसद सावित्री ठाकुर जैसे दिग्गज नेता के द्वारा भी इन मरीजों की सुविधाओं के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे है. जब बात खरमोर की निराकरण की आई तो सभी राजनीतिक दल अपने-अपने पार्टी का श्रेय लेने जनता के सामने आए मगर जब बात जनता की मूलभूत सुविधा की आती है
तो आखिर यही राजनेता घर से बाहर आकर मरीजों की परेशानी क्यों नहीं समझते अब देखना यह है कि इस खबर के प्रकाशित होने के बाद क्या मरीज को सुविधा करवा पाएंगे क्षेत्र के नेता व अधिकारी

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